श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.21.26

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

स चेह विप्र राजर्षिर्महिष्या शतरूपया।

आयास्यति दिदृक्षुस्त्वां परश्वो धर्मकोविदः॥ २६

sa ceha vipra rājarṣirmahiṣyā śatarūpayā|

āyāsyati didṛkṣustvāṃ paraśvo dharmakovidaḥ|| 26

अर्थ

विप्रवर! वे परम धर्मज्ञ महाराज महारानी शतरूपाके साथ तुमसे मिलनेके लिये परसों यहाँ आयेंगे॥ २६॥✎ 300

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #300 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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