श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.21.28

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

समाहितं ते हृदयं यत्रेमान् परिवत्सरान्।

सा त्वां ब्रह्मन्‍नृपवधूः काममाशु भजिष्यति॥ २८

samāhitaṃ te hṛdayaṃ yatremān parivatsarān|

sā tvāṃ brahmannṛpavadhūḥ kāmamāśu bhajiṣyati|| 28

अर्थ

ब्रह्मन्! गत अनेकों वर्षोंसे तुम्हारा चित्त जैसी भार्याके लिये समाहित रहा है, अब शीघ्र ही वह राजकन्या तुम्हारी वैसी ही पत्‍नी होकर यथेष्ट सेवा करेगी॥ २८॥

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