तुम भी मेरी आज्ञाका अच्छी तरह पालन करनेसे शुद्धचित्त हो, फिर अपने सब कर्मोंका फल मुझे अर्पणकर मुझको ही प्राप्त होओगे॥ ३०॥
त्वं च सम्यगनुष्ठाय निदेशं म उशत्तमः।
मयि तीर्थीकृताशेषक्रियार्थो मां प्रपत्स्यसे॥ ३०
तुम भी मेरी आज्ञाका अच्छी तरह पालन करनेसे शुद्धचित्त हो, फिर अपने सब कर्मोंका फल मुझे अर्पणकर मुझको ही प्राप्त होओगे॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.21.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 338) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/21/30/