श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.21.35

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

अथ सम्प्रस्थिते शुक्ले कर्दमो भगवानृषिः।

आस्ते स्म बिन्दुसरसि तं कालं प्रतिपालयन्॥ ३५

atha samprasthite śukle kardamo bhagavānṛṣiḥ|

āste sma bindusarasi taṃ kālaṃ pratipālayan|| 35

अर्थ

विदुरजी! श्रीहरिके चले जानेपर भगवान् कर्दम उनके बताये हुए समयकी प्रतीक्षा करते हुए बिन्दु-सरोवरपर ही ठहरे रहे ॥ ३५॥ वीरवर! इधर मनुजी भी महारानी शतरूपाके साथ सुवर्णजटित रथपर सवार होकर तथा उसपर अपनी कन्याको भी बिठाकर पृथ्वीपर विचरते हुए, जो दिन भगवान्‌ने बताया था, उसी दिन शान्तिपरायण महर्षि कर्दमके उस आश्रमपर पहुँचे॥ ३६-३७॥ ✎ 301

यह व्याख्या श्लोक 3.21.35 से 3.21.37 तककी एक साथ है।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #301 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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