श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.21.9

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

स तं विरजमर्काभं सितपद्मोत्पलस्रजम्।

स्निग्धनीलालकव्रातवक्‍त्राब्जं विरजोऽम्बरम्॥ ९

sa taṃ virajamarkābhaṃ sitapadmotpalasrajam|

snigdhanīlālakavrātavaktrābjaṃ virajo'mbaram|| 9

अर्थ

भगवान्‌की वह भव्य मूर्ति सूर्यके समान तेजोमयी थी। वे गलेमें श्वेत कमल और कुमुदके फूलोंकी माला धारण किये हुए थे, मुखकमल नीली और चिकनी अलकावलीसे सुशोभित था। वे निर्मल वस्त्र धारण किये हुए थे॥ ९॥✎ 297 298

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #297 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को
  • #298 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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