श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.22.1

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

अथ द्वाविंशोऽध्यायः

देवहूतिके साथ कर्दम प्रजापतिका विवाह

मैत्रेय उवाच

एवमाविष्कृताशेषगुणकर्मोदयो मुनिम्।

सव्रीड इव तं सम्राडुपारतमुवाच ह॥ १

evamāviṣkṛtāśeṣaguṇakarmodayo munim|

savrīḍa iva taṃ samrāḍupāratamuvāca ha|| 1

अर्थ

श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! इस प्रकार जब कर्दमजीने मनुजीके सम्पूर्ण गुणों और कर्मोंकी श्रेष्ठताका वर्णन किया तो उन्होंने उन निवृत्तिपरायण मुनिसे कुछ सकुचाकर कहा॥ १॥

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