॥ श्रीहरिः ॥
शतरूपा महाराज्ञी पारिब३र्हान्महाधनान्।
दम्पत्योः पर्यदात्प्रीत्या भूषावासः परिच्छदान्॥ २३
śatarūpā mahārājñī pāribarhānmahādhanān|
dampatyoḥ paryadātprītyā bhūṣāvāsaḥ paricchadān|| 23
अर्थ
महारानी शतरूपाने भी बेटी और दामादको बड़े प्रेमपूर्वक बहुत से बहुमूल्य वस्त्र, आभूषण और गृहस्थोचित पात्रादि दहेजमें दिये॥ २३॥✎ 1594
शतरूपा महाराज्ञी पारिबर्हान्महाधनान्।
दम्पत्योः पर्यदात्प्रीत्या भूषावासः परिच्छदान्॥ २३
महारानी शतरूपाने भी बेटी और दामादको बड़े प्रेमपूर्वक बहुत से बहुमूल्य वस्त्र, आभूषण और गृहस्थोचित पात्रादि दहेजमें दिये॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.22.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 343) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/22/23/टिप्पणियाँ
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प्रा० पा०—पारिहार्यं महाधनम्।
(मुद्रित पृष्ठ 343)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #1594 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: प्रसन्नता-पूर्वक → प्रसन्नतापूर्वक