श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.22.26

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

आमन्त्र्य तं मुनिवरमनुज्ञातः सहानुगः।

प्रतस्थे रथमारुह्य सभार्यः स्वपुरं नृपः॥ २६

āmantrya taṃ munivaramanujñātaḥ sahānugaḥ|

pratasthe rathamāruhya sabhāryaḥ svapuraṃ nṛpaḥ|| 26

अर्थ

फिर वे मुनिवर कर्दमसे पूछकर, उनकी आज्ञा ले रानीके सहित रथपर सवार हुए और अपने सेवकोंसहित ऋषिकुलसेवित सरस्वती नदीके दोनों तीरोंपर मुनियोंके आश्रमोंकी शोभा देखते हुए अपनी राजधानीमें चले आये॥ २६-२७॥

यह व्याख्या श्लोक 3.22.26 से 3.22.27 तककी एक साथ है।

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