जगत्के सर्वप्रथम सम्राट् महाराज मनु वास्तवमें कीर्तनके योग्य थे। यह मैंने उनके अद्भुत चरित्रका वर्णन किया, अब उनकी कन्या देवहूतिका प्रभाव सुनो॥ ३९॥✎ 306
एतत्त आदिराजस्य मनोश्चरितमद्भुतम्।
वर्णितं वर्णनीयस्य तदपत्योदयं शृणु॥ ३९
जगत्के सर्वप्रथम सम्राट् महाराज मनु वास्तवमें कीर्तनके योग्य थे। यह मैंने उनके अद्भुत चरित्रका वर्णन किया, अब उनकी कन्या देवहूतिका प्रभाव सुनो॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.22.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 345) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/22/39/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)