श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.22.8

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

स भवान्दुहितृस्नेहपरिक्लिष्टात्मनो मम।

श्रोतुमर्हसि दीनस्य श्रावितं कृपया मुने॥ ८

sa bhavānduhitṛsnehaparikliṣṭātmano mama|

śrotumarhasi dīnasya śrāvitaṃ kṛpayā mune|| 8

अर्थ

मुने! इस कन्याके स्नेहवश मेरा चित्त बहुत चिन्ताग्रस्त हो रहा है; अतः मुझ दीनकी यह प्रार्थना आप कृपापूर्वक सुनें॥ ८॥

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