॥ श्रीहरिः ॥
स भवान्दुहितृस्नेहपरिक्लिष्टात्मनो मम।
श्रोतुमर्हसि दीनस्य श्रावितं कृपया मुने॥ ८
sa bhavānduhitṛsnehaparikliṣṭātmano mama|
śrotumarhasi dīnasya śrāvitaṃ kṛpayā mune|| 8
अर्थ
मुने! इस कन्याके स्नेहवश मेरा चित्त बहुत चिन्ताग्रस्त हो रहा है; अतः मुझ दीनकी यह प्रार्थना आप कृपापूर्वक सुनें॥ ८॥
स भवान्दुहितृस्नेहपरिक्लिष्टात्मनो मम।
श्रोतुमर्हसि दीनस्य श्रावितं कृपया मुने॥ ८
मुने! इस कन्याके स्नेहवश मेरा चित्त बहुत चिन्ताग्रस्त हो रहा है; अतः मुझ दीनकी यह प्रार्थना आप कृपापूर्वक सुनें॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.22.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 341) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/22/8/