॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.23.31
स्नातं कृतशिरःस्नानं सर्वाभरणभूषितम्।
निष्कग्रीवं वलयिनं कूजत्कांचननूपुरम्॥ ३१
snātaṃ kṛtaśiraḥsnānaṃ sarvābharaṇabhūṣitam|
niṣkagrīvaṃ valayinaṃ kūjatkāṃcananūpuram|| 31
अर्थ
उसे सिरसे स्नान कराया गया है, स्नानके पश्चात् अंग-अंगमें सब प्रकारके आभूषण सजाये गये हैं तथा उसके गलेमें हार-हुमेल, हाथोंमें कङ्कण और पैरोंमें छमछमाते हुए सोनेके पायजेब सुशोभित हैं ॥ ३१॥