श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.24.30

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

स्वीयं वाक्यमृतं कर्तुमवतीर्णोऽसि मे गृहे।

चिकीर्षुर्भगवान् ज्ञानं भक्तानां मानवर्धनः॥ ३०

svīyaṃ vākyamṛtaṃ kartumavatīrṇo'si me gṛhe|

cikīrṣurbhagavān jñānaṃ bhaktānāṃ mānavardhanaḥ|| 30

अर्थ

आप वास्तवमें अपने भक्तोंका मान बढ़ानेवाले हैं। आपने अपने वचनोंको सत्य करने और सांख्ययोगका उपदेश करनेके लिये ही मेरे यहाँ अवतार लिया है॥ ३०॥

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