श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.24.39

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

मामात्मानं स्वयंज्योतिः सर्वभूतगुहाशयम्।

आत्मन्येवात्मना वीक्ष्य विशोकोऽभयमृच्छसि॥ ३९

māmātmānaṃ svayaṃjyotiḥ sarvabhūtaguhāśayam|

ātmanyevātmanā vīkṣya viśoko'bhayamṛcchasi|| 39

अर्थ

मैं स्वयंप्रकाश और सम्पूर्ण जीवोंके अन्तःकरणोंमें रहनेवाला परमात्मा ही हूँ। अतः जब तुम विशुद्ध बुद्धिके द्वारा अपने अन्तःकरणमें मेरा साक्षात्कार कर लोगे तब सब प्रकारके शोकोंसे छूटकर निर्भय पद (मोक्ष) प्राप्त कर लोगे॥ ३९॥

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