chettā te hṛdayagranthimaudaryo brahmabhāvanaḥ|| 4
अर्थ
इस प्रकार आराधना करनेपर श्रीहरि तुम्हारे गर्भसे अवतीर्ण होकर मेरा यश बढ़ावेंगे और ब्रह्मज्ञानका उपदेश करके तुम्हारे हृदयकी अहंकारमयी ग्रन्थिका छेदन करेंगे॥ ४॥
स त्वयाऽऽराधितः शुक्लो वितन्वन्मामकं यशः।
छेत्ता ते हृदयग्रन्थिमौदर्यो ब्रह्मभावनः॥ ४
इस प्रकार आराधना करनेपर श्रीहरि तुम्हारे गर्भसे अवतीर्ण होकर मेरा यश बढ़ावेंगे और ब्रह्मज्ञानका उपदेश करके तुम्हारे हृदयकी अहंकारमयी ग्रन्थिका छेदन करेंगे॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.24.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 352) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/24/4/