इस प्रकार बहुत समय बीत जानेपर भगवान् मधुसूदन कर्दमजीके वीर्यका आश्रय ले उसके गर्भसे इस प्रकार प्रकट हुए, जैसे काष्ठमेंसे अग्नि॥ ६॥
तस्यां बहुतिथे काले भगवान्मधुसूदनः।
कार्दमं वीर्यमापन्नो जज्ञेऽग्निरिव दारुणि॥ ६
इस प्रकार बहुत समय बीत जानेपर भगवान् मधुसूदन कर्दमजीके वीर्यका आश्रय ले उसके गर्भसे इस प्रकार प्रकट हुए, जैसे काष्ठमेंसे अग्नि॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.24.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 352) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/24/6/