योगियोंके लिये भगवत्प्राप्तिके निमित्त सर्वात्मा श्रीहरिके प्रति की हुई भक्तिके समान और कोई मंगलमय मार्ग नहीं है॥ १९॥
न युज्यमानया भक्त्या भगवत्यखिलात्मनि।
सदृशोऽस्ति शिवः पन्था योगिनां ब्रह्मसिद्धये॥ १९
योगियोंके लिये भगवत्प्राप्तिके निमित्त सर्वात्मा श्रीहरिके प्रति की हुई भक्तिके समान और कोई मंगलमय मार्ग नहीं है॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.25.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 358) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/25/19/