निर्वाणस्वरूप प्रभो! जिसके द्वारा तत्त्वज्ञान होता है और जो लक्ष्यको बेधनेवाले बाणके समान भगवान्की प्राप्ति करानेवाला है, वह आपका कहा हुआ योग कैसा है और उसके कितने अंग हैं?॥ २९॥✎ 313
यो योगो भगवद्बाणो निर्वाणात्मंस्त्वयोदितः।
कीदृशः कति चांगानि यतस्तत्त्वावबोधनम्॥ २९
निर्वाणस्वरूप प्रभो! जिसके द्वारा तत्त्वज्ञान होता है और जो लक्ष्यको बेधनेवाले बाणके समान भगवान्की प्राप्ति करानेवाला है, वह आपका कहा हुआ योग कैसा है और उसके कितने अंग हैं?॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.25.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 359) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/25/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)