श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.26.6

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

एवं पराभिध्यानेन कर्तृत्वं प्रकृतेः पुमान्।

कर्मसु क्रियमाणेषु गुणैरात्मनि मन्यते॥ ६

evaṃ parābhidhyānena kartṛtvaṃ prakṛteḥ pumān|

karmasu kriyamāṇeṣu guṇairātmani manyate|| 6

अर्थ

इस प्रकार अपनेसे भिन्‍न प्रकृतिको ही अपना स्वरूप समझ लेनेसे पुरुष प्रकृतिके गुणोंद्वारा किये जानेवाले कर्मोंमें अपनेको ही कर्ता मानने लगता है॥ ६॥✎ 317

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #317 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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