श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.26.66

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

गुदं मृत्युरपानेन नोदतिष्ठत्तदा विराट्।

हस्ताविन्द्रो बलेनैव नोदतिष्ठत्तदा विराट्॥ ६६

gudaṃ mṛtyurapānena nodatiṣṭhattadā virāṭ|

hastāvindro balenaiva nodatiṣṭhattadā virāṭ|| 66

अर्थ

मृत्युने अपानके साथ गुदामें प्रवेश किया, फिर भी विराट् पुरुष न उठा। इन्द्रने बलके साथ हाथोंमें प्रवेश किया, परन्तु इससे भी विराट् पुरुष न उठा॥ ६६॥

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