श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.29.27

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

अथ मां सर्वभूतेषु भूतात्मानं कृतालयम्।

अर्हयेद्दानमानाभ्यां मैत्र्याभिन्‍नेन चक्षुषा॥ २७

atha māṃ sarvabhūteṣu bhūtātmānaṃ kṛtālayam|

arhayeddānamānābhyāṃ maitryābhinnena cakṣuṣā|| 27

अर्थ

अतः सम्पूर्ण प्राणियोंके भीतर घर बनाकर उन प्राणियोंके ही रूपमें स्थित मुझ परमात्माका यथायोग्य दान, मान, मित्रताके व्यवहार तथा समदृष्टिके द्वारा पूजन करना चाहिये॥ २७॥

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