श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.29.34

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

मनसैतानि भूतानि प्रणमेद्बहु मानयन्।

ईश्‍वरो जीवकलया प्रविष्टो भगवानिति॥ ३४

manasaitāni bhūtāni praṇamedbahu mānayan|

īśvaro jīvakalayā praviṣṭo bhagavāniti|| 34

अर्थ

अतः यह मानकर कि जीवरूप अपने अंशसे साक्षात् भगवान् ही सबमें अनुगत हैं, इन समस्त प्राणियोंको बड़े आदरके साथ मनसे प्रणाम करे॥ ३४॥

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