श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.30.26

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

जीवतश्चान्त्राभ्युद्धारः श्‍वगृध्रैर्यमसादने।

सर्पवृश्चिकदंशाद्यैर्दशद्भिश्चात्मवैशसम्॥ २६

jīvataścāntrābhyuddhāraḥ śvagṛdhrairyamasādane|

sarpavṛścikadaṃśādyairdaśadbhiścātmavaiśasam|| 26

अर्थ

यमपुरीके कुत्तों अथवा गिद्धोंद्वारा जीते-जी उसकी आँतें खींची जाती हैं। साँप, बिच्छू और डाँस आदि डसनेवाले तथा डंक मारनेवाले जीवोंसे शरीरको पीड़ा पहुँचायी जाती है॥ २६॥

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