॥ श्रीहरिः ॥
बलं मे पश्य मायायाः स्त्रीमय्या जयिनो दिशाम्।
या करोति पदाक्रान्तान् भ्रूविजृम्भेण केवलम्॥ ३८
balaṃ me paśya māyāyāḥ strīmayyā jayino diśām|
yā karoti padākrāntān bhrūvijṛmbheṇa kevalam|| 38
अर्थ
अहो! मेरी इस स्त्रीरूपिणी मायाका बल तो देखो, जो अपने भ्रुकुटि-विलासमात्रसे बड़े-बड़े दिग्विजयी वीरोंको पैरोंसे कुचल देती है॥ ३८॥
बलं मे पश्य मायायाः स्त्रीमय्या जयिनो दिशाम्।
या करोति पदाक्रान्तान् भ्रूविजृम्भेण केवलम्॥ ३८
अहो! मेरी इस स्त्रीरूपिणी मायाका बल तो देखो, जो अपने भ्रुकुटि-विलासमात्रसे बड़े-बड़े दिग्विजयी वीरोंको पैरोंसे कुचल देती है॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.31.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 394) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/31/38/