॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.32.26
ज्ञानमात्रं परं ब्रह्म परमात्मेश्वरः पुमान्।
दृश्यादिभिः पृथग्भावैर्भगवानेक ईयते॥ २६
jñānamātraṃ paraṃ brahma paramātmeśvaraḥ pumān|
dṛśyādibhiḥ pṛthagbhāvairbhagavāneka īyate|| 26
अर्थ
वही ज्ञानस्वरूप है, वही परब्रह्म है, वही परमात्मा है, वही ईश्वर है, वही पुरुष है; वही एक भगवान् स्वयं जीव, शरीर, विषय, इन्द्रियों आदि अनेक रूपोंमें प्रतीत होता है॥ २६॥