जो लोग परमात्मदृष्टिसे हिरण्यगर्भकी उपासना करते हैं, वे दो परार्द्धमें होनेवाले ब्रह्माजीके प्रलयपर्यन्त उनके सत्यलोकमें ही रहते हैं॥ ८॥✎ 345346
द्विपरार्द्धावसाने यः प्रलयो ब्रह्मणस्तु ते।
तावदध्यासते लोकं परस्य परचिन्तकाः॥ ८
जो लोग परमात्मदृष्टिसे हिरण्यगर्भकी उपासना करते हैं, वे दो परार्द्धमें होनेवाले ब्रह्माजीके प्रलयपर्यन्त उनके सत्यलोकमें ही रहते हैं॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.32.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 396) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/32/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#345 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्में