श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.33.11

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 33 · अथ त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः

श्रद्धत्स्वैतन्मतं मह्यं जुष्टं यद्ब्रह्मवादिभिः।

येन मामभवं याया मृत्युमृच्छन्त्यतद्विदः॥ ११

śraddhatsvaitanmataṃ mahyaṃ juṣṭaṃ yadbrahmavādibhiḥ|

yena māmabhavaṃ yāyā mṛtyumṛcchantyatadvidaḥ|| 11

अर्थ

तुम मेरे इस मतमें विश्वास करो, ब्रह्मवादी लोगोंने इसका सेवन किया है; इसके द्वारा तुम मेरे जन्म-मरणरहित स्वरूपको प्राप्त कर लोगी। जो लोग मेरे इस मतको नहीं जानते, वे जन्म-मृत्युके चक्रमें पड़ते हैं॥ ११॥

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