श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.33.15

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 33 · अथ त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः

प्रजापतेः कर्दमस्य तपोयोगविजृम्भितम्।

स्वगार्हस्थ्यमनौपम्यं प्रार्थ्यं वैमानिकैरपि॥ १५

prajāpateḥ kardamasya tapoyogavijṛmbhitam|

svagārhasthyamanaupamyaṃ prārthyaṃ vaimānikairapi|| 15

अर्थ

उन्होंने प्रजापति कर्दमके तप और योगबलसे प्राप्त अनुपम गार्हस्थ्यसुखको, जिसके लिये देवता भी तरसते थे, त्याग दिया॥ १५॥

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