वीरवर! जिस स्थानपर उन्हें सिद्धि प्राप्त हुई थी, वह परम पवित्र क्षेत्र त्रिलोकीमें ‘सिद्धपद’ नामसे विख्यात हुआ॥ ३१॥
तद्वीरासीत्पुण्यतमं क्षेत्रं त्रैलोक्यविश्रुतम्।
नाम्ना सिद्धपदं यत्र सा संसिद्धिमुपेयुषी॥ ३१
वीरवर! जिस स्थानपर उन्हें सिद्धि प्राप्त हुई थी, वह परम पवित्र क्षेत्र त्रिलोकीमें ‘सिद्धपद’ नामसे विख्यात हुआ॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.33.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 404) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/33/31/