श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.5.17

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

स एवं भगवान् पृष्टः क्षत्त्रा कौषारविर्मुनिः।

पुंसां निःश्रेयसार्थेन तमाह बहु मानयन्॥ १७

sa evaṃ bhagavān pṛṣṭaḥ kṣattrā kauṣāravirmuniḥ|

puṃsāṃ niḥśreyasārthena tamāha bahu mānayan|| 17

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—जब विदुरजीने जीवोंके कल्याणके लिये इस प्रकार प्रश्न किया, तब तो मुनिश्रेष्ठ भगवान् मैत्रेयजीने उनकी बहुत बड़ाई करते हुए यों कहा॥ १७॥

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