आप श्रीव्यासजीके औरस पुत्र हैं; इसलिये आपके लिये यह कोई बड़ी बात नहीं है कि आप अनन्यभावसे सर्वेश्वर श्रीहरिके ही आश्रित हो गये हैं॥ १९॥✎ 210211
नैतच्चित्रं त्वयि क्षत्तर्बादरायणवीर्यजे।
गृहीतोऽनन्यभावेन यत्त्वया हरिरीश्वरः॥ १९
आप श्रीव्यासजीके औरस पुत्र हैं; इसलिये आपके लिये यह कोई बड़ी बात नहीं है कि आप अनन्यभावसे सर्वेश्वर श्रीहरिके ही आश्रित हो गये हैं॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.5.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 255) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/5/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)