आप सर्वदा ही श्रीभगवान् और उनके भक्तोंको अत्यन्त प्रिय हैं; इसीलिये भगवान् निजधाम पधारते समय मुझे आपको ज्ञानोपदेश करनेकी आज्ञा दे गये हैं॥ २१॥✎ 210211
भवान् भगवतो नित्यं सम्मतः सानुगस्य च।
यस्य ज्ञानोपदेशाय माऽऽदिशद्भगवान् व्रजन्॥ २१
आप सर्वदा ही श्रीभगवान् और उनके भक्तोंको अत्यन्त प्रिय हैं; इसीलिये भगवान् निजधाम पधारते समय मुझे आपको ज्ञानोपदेश करनेकी आज्ञा दे गये हैं॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.5.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 255) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/5/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)