श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.6.5

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

परेण विशता स्वस्मिन्मात्रया विश्‍वसृग्गणः।

चुक्षोभान्योन्यमासाद्य यस्मिल्‍ँलोकाश्‍चराचराः॥ ५

pareṇa viśatā svasminmātrayā viśvasṛggaṇaḥ|

cukṣobhānyonyamāsādya yasmilm̐lokāścarācarāḥ|| 5

अर्थ

अर्थात् जब भगवान्‌ने अंशरूपसे अपने उस शरीरमें प्रवेश किया, तब वह विश्‍वरचना करनेवाला महत्तत्त्वादिका समुदाय एक-दूसरेसे मिलकर परिणामको प्राप्त हुआ। यह तत्त्वोंका परिणाम ही विराट् पुरुष है, जिसमें चराचर जगत् विद्यमान है॥ ५॥✎ 216 217 218 219 1300 1301

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (6)
  • #216 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #217 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #218 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #219 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #1300 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): हुए। → हुए
  • #1301 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पंच-तन्मात्रा → पंचतन्मात्रा

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