श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.6.8

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

एष ह्यशेषसत्त्वानामात्मांशः परमात्मनः।

आद्योऽवतारो यत्रासौ भूतग्रामो विभाव्यते॥ ८

eṣa hyaśeṣasattvānāmātmāṃśaḥ paramātmanaḥ|

ādyo'vatāro yatrāsau bhūtagrāmo vibhāvyate|| 8

अर्थ

यह विराट् पुरुष ही प्रथम जीव होनेके कारण समस्त जीवोंका आत्मा, जीवरूप होनेके कारण परमात्माका अंश और प्रथम अभिव्यक्त होनेके कारण भगवान्‌का आदि-अवतार है। यह सम्पूर्ण भूतसमुदाय इसीमें प्रकाशित होता है॥ ८॥✎ 216 217 218 219 1300 1301

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (6)
  • #216 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #217 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #218 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #219 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #1300 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): हुए। → हुए
  • #1301 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पंच-तन्मात्रा → पंचतन्मात्रा

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