श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.7.8

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

स इत्थं चोदितः क्षत्त्रा तत्त्वजिज्ञासुना मुनिः।

प्रत्याह भगवच्चित्तः स्मयन्‍निव गतस्मयः॥ ८

sa itthaṃ coditaḥ kṣattrā tattvajijñāsunā muniḥ|

pratyāha bhagavaccittaḥ smayanniva gatasmayaḥ|| 8

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—तत्त्वजिज्ञासु विदुरजीकी यह प्रेरणा प्राप्तकर अहंकारहीन श्रीमैत्रेयजीने भगवान्‌का स्मरण करते हुए मुसकराते हुए कहा॥ ८॥

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