श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.9.33

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

यदा रहितमात्मानं भूतेन्द्रियगुणाशयैः३।

स्वरूपेण मयोपेतं पश्यन् स्वाराज्यमृच्छति॥ ३३

yadā rahitamātmānaṃ bhūtendriyaguṇāśayaiḥ|

svarūpeṇa mayopetaṃ paśyan svārājyamṛcchati|| 33

अर्थ

जब वह अपनेको भूत, इन्द्रिय, गुण और अन्तःकरणसे रहित तथा स्वरूपतः मुझसे अभिन्‍न देखता है, तब मोक्षपद प्राप्त कर लेता है॥ ३३॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—गुणाश्रयैः।

    (मुद्रित पृष्ठ 277)

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