श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.9.39

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

प्रीतोऽहमस्तु भद्रं ते लोकानां विजयेच्छया।

यदस्तौषीर्गुणमयं निर्गुणं मानुवर्णयन्॥ ३९

prīto'hamastu bhadraṃ te lokānāṃ vijayecchayā|

yadastauṣīrguṇamayaṃ nirguṇaṃ mānuvarṇayan|| 39

अर्थ

लोकरचनाकी इच्छासे तुमने सगुण प्रतीत होनेपर भी जो निर्गुणरूपसे मेरा वर्णन करते हुए स्तुति की है, उससे मैं बहुत प्रसन्‍न हूँ; तुम्हारा कल्याण हो॥ ३९॥

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