श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

चतुर्थ स्कन्ध

31 अध्याय · 1445 श्लोक

॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

श्रीमद्भागवतमहापुराणम्

चतुर्थः स्कन्धः

  1. 1अथ प्रथमोऽध्यायःस्वायम्भुव-मनुकी कन्याओंके वंशका वर्णन66 श्लोक
    पृष्ठ 404
  2. 2अथ द्वितीयोऽध्यायःभगवान् शिव और दक्ष प्रजापतिका मनोमालिन्य35 श्लोक
    पृष्ठ 411
  3. 3अथ तृतीयोऽध्यायःसतीका पिताके यहाँ यज्ञोत्सवमें जानेके लिये आग्रह करना25 श्लोक
    पृष्ठ 415
  4. 4अथ चतुर्थोऽध्यायःसतीका अग्‍निप्रवेश34 श्लोक
    पृष्ठ 419
  5. 5अथ पञ्चमोऽध्यायःवीरभद्रकृत दक्षयज्ञविध्वंस और दक्षवध26 श्लोक
    पृष्ठ 423
  6. 6अथ षष्ठोऽध्यायःब्रह्मादि देवताओंका कैलास जाकर श्रीमहादेवजीको मनाना53 श्लोक
    पृष्ठ 427
  7. 7अथ सप्तमोऽध्यायःदक्षयज्ञकी पूर्ति61 श्लोक
    पृष्ठ 434
  8. 8अथाष्टमोऽध्यायःध्रुवका वन-गमन82 श्लोक
    पृष्ठ 442
  9. 9अथ नवमोऽध्यायःध्रुवका वर पाकर घर लौटना67 श्लोक
    पृष्ठ 452
  10. 10अथ दशमोऽध्यायःउत्तमका मारा जाना, ध्रुवका यक्षोंके साथ युद्ध30 श्लोक
    पृष्ठ 460
  11. 11अथैकादशोऽध्यायःस्वायम्भुव-मनुका ध्रुवजीको युद्ध बंद करनेके लिये समझाना35 श्लोक
    पृष्ठ 463
  12. 12अथ द्वादशोऽध्यायःध्रुवजीको कुबेरका वरदान और विष्णुलोककी प्राप्ति52 श्लोक
    पृष्ठ 467
  13. 13अथ त्रयोदशोऽध्यायःध्रुववंशका वर्णन, राजा अंगका चरित्र49 श्लोक
    पृष्ठ 473
  14. 14अथ चतुर्दशोऽध्यायःराजा वेनकी कथा46 श्लोक
    पृष्ठ 478
  15. 15अथ पञ्चदशोऽध्यायःमहाराज पृथुका आविर्भाव और राज्याभिषेक26 श्लोक
    पृष्ठ 482
  16. 16अथ षोडशोऽध्यायःवन्दीजनद्वारा महाराज पृथुकी स्तुति27 श्लोक
    पृष्ठ 485
  17. 17अथ सप्तदशोऽध्यायःमहाराज पृथुका पृथ्वीपर कुपित होना और पृथ्वीके द्वारा उनकी स्तुति करना36 श्लोक
    पृष्ठ 488
  18. 18अथाष्टादशोऽध्यायःपृथ्वी-दोहन32 श्लोक
    पृष्ठ 493
  19. 19अथैकोनविंशोऽध्यायःमहाराज पृथुके सौ अश्‍वमेध यज्ञ42 श्लोक
    पृष्ठ 496
  20. 20अथ विंशोऽध्यायःमहाराज पृथुकी यज्ञशालामें श्रीविष्णुभगवान्‌का प्रादुर्भाव38 श्लोक
    पृष्ठ 500
  21. 21अथैकविंशोऽध्यायःमहाराज पृथुका अपनी प्रजाको उपदेश52 श्लोक
    पृष्ठ 504
  22. 22अथ द्वाविंशोऽध्यायःमहाराज पृथुको सनकादिका उपदेश63 श्लोक
    पृष्ठ 512
  23. 23अथ त्रयोविंशोऽध्यायःराजा पृथुकी तपस्या और परलोकगमन39 श्लोक
    पृष्ठ 519
  24. 24अथ चतुर्विंशोऽध्यायःपृथुकी वंशपरम्परा और प्रचेताओंको भगवान् रुद्रका उपदेश79 श्लोक
    पृष्ठ 524
  25. 25अथ पञ्चविंशोऽध्यायःपुरंजनोपाख्यानका प्रारम्भ62 श्लोक
    पृष्ठ 533
  26. 26अथ षड्विंशोऽध्यायःराजा पुरंजनका शिकार खेलने वनमें जाना और रानीका कुपित होना26 श्लोक
    पृष्ठ 540
  27. 27अथ सप्तविंशोऽध्यायःपुरंजनपुरीपर चण्डवेगकी चढ़ाई तथा कालकन्याका चरित्र30 श्लोक
    पृष्ठ 543
  28. 28अथाष्टाविंशोऽध्यायःपुरंजनको स्त्रीयोनिकी प्राप्ति और अविज्ञातके उपदेशसे उसका मुक्त होना65 श्लोक
    पृष्ठ 546
  29. 29अथैकोनत्रिंशोऽध्यायःपुरंजनोपाख्यानका तात्पर्य85 श्लोक
    पृष्ठ 553
  30. 30अथ त्रिंशोऽध्यायःप्रचेताओंको श्रीविष्णुभगवान्‌का वरदान51 श्लोक
    पृष्ठ 563
  31. 31अथैकत्रिंशोऽध्यायःप्रचेताओंको श्रीनारदजीका उपदेश और उनका परमपद-लाभ31 श्लोक
    पृष्ठ 569

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