श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.11.9

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

एकादशासन्मनसो हि वृत्तय

आकूतयः पञ्च धियोऽभिमानः।

मात्राणि कर्माणि पुरं च तासां

वदन्ति हैकादश वीर भूमीः॥ ९

ekādaśāsanmanaso hi vṛttaya

ākūtayaḥ pañca dhiyo'bhimānaḥ|

mātrāṇi karmāṇi puraṃ ca tāsāṃ

vadanti haikādaśa vīra bhūmīḥ|| 9

अर्थ

वीरवर! पाँच कर्मेन्द्रिय, पाँच ज्ञानेन्द्रिय और एक अहंकार—ये ग्यारह मनकी वृत्तियाँ हैं तथा पाँच प्रकारके कर्म, पाँच तन्मात्र और एक शरीर—ये ग्यारह उनके आधारभूत विषय कहे जाते हैं॥ ९॥

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