श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.18.6

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

वेदान् युगान्ते तमसा तिरस्कृतान्

रसातलाद्यो नृतुरङ्गविग्रहः।

प्रत्याददे वै कवयेऽभियाचते

तस्मै नमस्तेऽवितथेहिताय इति॥ ६

vedān yugānte tamasā tiraskṛtān

rasātalādyo nṛturaṅgavigrahaḥ|

pratyādade vai kavaye'bhiyācate

tasmai namaste'vitathehitāya iti|| 6

अर्थ

आपका विग्रह मनुष्य और घोड़ेका संयुक्त रूप है। प्रलयकालमें जब तमःप्रधान दैत्यगण वेदोंको चुरा ले गये थे, तब ब्रह्माजीके प्रार्थना करनेपर आपने उन्हें रसातलसे लाकर दिया। ऐसे अमोघ लीला करनेवाले सत्यसंकल्प आपको मैं नमस्कार करता हूँ॥ ६॥

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