श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.2.1

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

अथ द्वितीयोऽध्यायः

आग्नीध्र-चरित्र

श्रीशुक उवाच

एवं पितरि सम्प्रवृत्ते तदनुशासने वर्तमान आग्नीध्रो जम्बूद्वीपौकसः प्रजा औरसवद्धर्मावेक्षमाणः पर्यगोपायत्॥ १॥

evaṃ pitari sampravṛtte tadanuśāsane vartamāna āgnīdhro jambūdvīpaukasaḥ prajā aurasavaddharmāvekṣamāṇaḥ paryagopāyat|| 1||

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—पिता प्रियव्रतके इस प्रकार तपस्यामें संलग्न हो जानेपर राजा आग्नीध्र उनकी आज्ञाका अनुसरण करते हुए जम्बूद्वीपकी प्रजाका धर्मानुसार पुत्रवत् पालन करने लगे॥ १॥

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