(और कहते हैं—) ‘जो कृष्णपक्ष और शुक्लपक्षमें अपनी किरणोंसे विभाग करके देवता, पितर और सम्पूर्ण प्राणियोंको अन्न देते हैं, वे चन्द्रदेव हमारे राजा (रंजन करनेवाले) हों’॥ १२॥✎ 468
स्वगोभिः पितृदेवेभ्यो विभजन् कृष्णशुक्लयोः।
प्रजानां सर्वासां राजान्धः सोमो न आस्त्विति॥ १२
(और कहते हैं—) ‘जो कृष्णपक्ष और शुक्लपक्षमें अपनी किरणोंसे विभाग करके देवता, पितर और सम्पूर्ण प्राणियोंको अन्न देते हैं, वे चन्द्रदेव हमारे राजा (रंजन करनेवाले) हों’॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.20.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 663) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/5/20/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)