श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.26.12

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

एवमेव महारौरवो यत्र निपतितं पुरुषं क्रव्यादा१ नाम रुरवस्तं क्रव्येण घातयन्ति यः केवलं देहम्भरः॥ १२॥✎ 956

evameva mahārauravo yatra nipatitaṃ puruṣaṃ kravyādā nāma ruravastaṃ kravyeṇa ghātayanti yaḥ kevalaṃ dehambharaḥ|| 12||

अर्थ

ऐसा ही महारौरव नरक है। इसमें वह व्यक्ति जाता है, जो और किसीकी परवा न कर केवल अपने ही शरीरका पालन-पोषण करता है। वहाँ कच्चा मांस खानेवाले रुरु इसे मांसके लोभसे काटते हैं॥ १२॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—क्रव्यादा रुरवस्तं।

    (मुद्रित पृष्ठ 688)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #956 शब्दोंके बीचका स्थान: के वलं → केवलं

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