श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.4.11

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

कविर्हरिरन्तरिक्षः प्रबुद्धः पिप्पलायनः।

आविर्होत्रोऽथ द्रुमिलश्‍चमसः करभाजनः॥ ११

kavirharirantarikṣaḥ prabuddhaḥ pippalāyanaḥ|

āvirhotro'tha drumilaścamasaḥ karabhājanaḥ|| 11

अर्थ

उनसे छोटे कवि, हरि, अन्तरिक्ष, प्रबुद्ध, पिप्पलायन, आविर्होत्र, द्रुमिल, चमस और करभाजन—ये नौ राजकुमार भागवतधर्मका प्रचार करनेवाले बड़े भगवद्भक्त थे। भगवान्‌की महिमासे महिमान्वित और परम शान्तिसे पूर्ण इनका पवित्र चरित हम नारद-वसुदेवसंवादके प्रसंगसे आगे (एकादश स्कन्धमें) कहेंगे॥ ११-१२॥✎ 440

यह अर्थ श्लोक 11–12 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #440 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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