श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.6.14

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

अहो नु वंशो यशसावदातः

प्रैयव्रतो यत्र पुमान् पुराणः।

कृतावतारः पुरुषः स आद्य-

श्‍चचार धर्मं यदकर्महेतुम्॥ १४

aho nu vaṃśo yaśasāvadātaḥ

praiyavrato yatra pumān purāṇaḥ|

kṛtāvatāraḥ puruṣaḥ sa ādya-

ścacāra dharmaṃ yadakarmahetum|| 14

अर्थ

अहो! महाराज प्रियव्रतका वंश बड़ा ही उज्ज्वल एवं सुयशपूर्ण है, जिसमें पुराणपुरुष श्रीआदिनारायणने ऋषभावतार लेकर मोक्षकी प्राप्ति करानेवाले पारमहंस्य धर्मका आचरण किया॥ १४॥

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