atha samīravegavidhūtaveṇuvikarṣaṇajātogradāvānalastadvanamālelihānaḥ saha tena dadāha|| 8||
अर्थ
इसी समय झंझावातसे झकझोरे हुए बाँसोंके घर्षणसे प्रबल दावाग्नि धधक उठी और उसने सारे वनको अपनी लाल-लाल लपटोंमें लेकर ऋषभदेवजीके सहित भस्म कर दिया॥ ८॥
अथ समीरवेगविधूतवेणुविकर्षणजातोग्रदावानलस्तद्वनमालेलिहानः सह तेन ददाह॥ ८॥
इसी समय झंझावातसे झकझोरे हुए बाँसोंके घर्षणसे प्रबल दावाग्नि धधक उठी और उसने सारे वनको अपनी लाल-लाल लपटोंमें लेकर ऋषभदेवजीके सहित भस्म कर दिया॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.6.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 601) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/5/6/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)