उस समय बालक नारायण वहाँसे कुछ दूरीपर खेल रहा था। यमदूतोंको देखकर अजामिल अत्यन्त व्याकुल हो गया और उसने बहुत ऊँचे स्वरसे पुकारा—‘नारायण!’॥ २९॥
दूरे क्रीडनकासक्तं पुत्रं नारायणाह्वयम्।
प्लावितेन स्वरेणोच्चैराजुहावाकुलेन्द्रियः॥ २९
उस समय बालक नारायण वहाँसे कुछ दूरीपर खेल रहा था। यमदूतोंको देखकर अजामिल अत्यन्त व्याकुल हो गया और उसने बहुत ऊँचे स्वरसे पुकारा—‘नारायण!’॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.1.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 698) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/1/29/