श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.1.5

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

धरामण्डलसंस्थानं भागलक्षणमानतः।

ज्योतिषां विवराणां च यथेदमसृजद्विभुः॥ ५

dharāmaṇḍalasaṃsthānaṃ bhāgalakṣaṇamānataḥ|

jyotiṣāṃ vivarāṇāṃ ca yathedamasṛjadvibhuḥ|| 5

अर्थ

भूमण्डलकी स्थिति, उसके द्वीप-वर्षादि विभाग, उनके लक्षण तथा परिमाण, नक्षत्रोंकी स्थिति, अतल-वितल आदि भू-विवर (सात-पाताल) और भगवान्‌ने इन सबकी जिस प्रकार सृष्टि की—उसका वर्णन भी सुनाया॥ ५॥ ✎ 491

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #491 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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