श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.1.58

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

एकदासौ वनं यातः पितृसन्देशकृद् द्विजः।

आदाय तत आवृत्तः फलपुष्पसमित्कुशान्॥ ५८

ekadāsau vanaṃ yātaḥ pitṛsandeśakṛd dvijaḥ|

ādāya tata āvṛttaḥ phalapuṣpasamitkuśān|| 58

अर्थ

एक दिन यह ब्राह्मण अपने पिताके आदेशानुसार वनमें गया और वहाँसे फल-फूल, समिधा तथा कुश लेकर घरके लिये लौटा॥ ५८॥

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