श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.10.19

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

नमुचिः शम्बरोऽनर्वा द्विमूर्धा ऋषभोऽम्बरः।

हयग्रीवः शङ्कुशिरा विप्रचित्तिरयोमुखः॥ १९

namuciḥ śambaro'narvā dvimūrdhā ṛṣabho'mbaraḥ|

hayagrīvaḥ śaṅkuśirā vipracittirayomukhaḥ|| 19

अर्थ

तब नमुचि, शम्बर, अनर्वा, द्विमूर्धा, ऋषभ, अम्बर, हयग्रीव, शंकुशिरा, विप्रचित्ति, अयोमुख, पुलोमा, वृषपर्वा, प्रहेति, हेति, उत्कल, सुमाली, माली आदि हजारों दैत्य-दानव एवं यक्ष-राक्षस स्वर्णके साज-सामानसे सुसज्जित होकर देवराज इन्द्रकी सेनाको आगे बढ़नेसे रोकने लगे। परीक्षित्! उस समय देवताओंकी सेना स्वयं मृत्युके लिये भी अजेय थी॥ १९—२१॥

यह अर्थ श्लोक 19–21 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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