श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.10.31

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

कालोपपन्‍नां रुचिरां मनस्विना-

मुवाच वाचं पुरुषप्रवीरः।

हे विप्रचित्ते नमुचे पुलोमन्

मयानर्वञ्छम्बर मे शृणुध्वम्॥ ३१

kālopapannāṃ rucirāṃ manasvinā-

muvāca vācaṃ puruṣapravīraḥ|

he vipracitte namuce puloman

mayānarvañchambara me śṛṇudhvam|| 31

अर्थ

वीरशिरोमणि वृत्रासुरने समयानुसार वीरोचित वाणीसे विप्रचित्ति, नमुचि, पुलोमा, मय, अनर्वा, शम्बर आदि दैत्योंको सम्बोधित करके कहा—‘असुरो! भागो मत, मेरी एक बात सुन लो॥ ३१॥

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